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सत्य और समाज के बीच की कड़ी

पंचायत में 'गेमिंग लैपटॉप' कांड-गोटेगांव के 'ऑल इन वन ट्रेडर्स' से 85 हजार..

सुरवारी में मोतीचूर के लड्डुओं के बाद अब सिवनी बंधा पंचायत में गोटेगांव के 'ऑल इन वन ट्रेडर्स' से 85 हजार का 'गेमिंग लैपटॉप' कांड!

सुना था कि पंचायतें गांव के विकास के लिए होती हैं, जनता के हक और बुनियादी सुविधाओं के लिए होती हैं लेकिन गोटेगांव के रिपटा कॉम्प्लेक्स स्थित 'ऑल इन वन ट्रेडर्स' और सिवनी बंधा ग्राम पंचायत के बीच जो खेल चल रहा है, उसे देखकर तो यही लगता है कि पंचायतें अब जनता की गाढ़ी कमाई उड़ाने का अखाड़ा बन चुकी हैं!

मोतीचूर के मीठे लड्डुओं का स्वाद अभी लोगों की जुबान से उतरा भी नहीं था, कि अब 85,000 रुपये के गेमिंग लैपटॉप का ऐसा बड़ा गोलमाल सामने आया है, जो सिस्टम की नींव हिलाकर रख देगा! 

सवाल सिर्फ एक लैपटॉप का नहीं है, सवाल आपकी नीयत और इस खुली लूट का है!

"जरा इन दस्तावेजों पर गौर फरमाइश कीजिए! तारीख है 03 सितंबर 2026। दुकान का नाम है ऑल इन वन ट्रेडर्स, रिपटा कॉम्प्लेक्स, गोटेगांव। खरीदार कौन? सरपंच और सचिव, ग्राम पंचायत सिवनी बंधा। और सामान क्या खरीदा गया? Dell Laptop (G-Series / Alienware)—और कीमत चुकाई गई पूरी पचासी हजार रुपये (₹85,000)!

अब जो लोग थोड़ा-बहुत भी कंप्यूटर की दुनिया को समझते हैं, वे जानते हैं कि 'एलियनवेयर' या 'जी-सीरीज' क्या बला है। ये गेमिंग लैपटॉप हैं। इनमें ऐसे-ऐसे भारी-भरकम ग्राफिक्स कार्ड लगे होते हैं, जिन पर आप चाहें तो वर्चुअल रियलिटी में पूरी दुनिया की सैर कर लें, या फिर कोई हाई-एंड ग्राफिक्स वाला गेम खेल लें, जिसमें कारें हवा में उड़ती हैं।

बिल पर 'G-Series / Alienware' दोनों एक साथ लिखवाने का कौन सा नया गणित है? क्या तकनीकी गफलत के जाल में उलझाकर इस फर्जीवाड़े को छिपाने की शातिर साजिश रची गई थी?

पंचायत के काम क्या होते हैं? ई-ग्राम स्वराज पोर्टल चलाना, एक्सेल शीट पर डेटा एंट्री करना, मनरेगा के कागजात तैयार करना और छोटे-मोटे सरकारी ईमेल भेजना! इन साधारण कामों के लिए मार्केट में 30 से 45 हजार रुपये का शानदार लैपटॉप पूरी तरह से काफी होता है. 

तो फिर जनता के टैक्स के पैसों से 85,000 रुपये का हाई-एंड ग्राफिक्स कार्ड और पावरफुल प्रोसेसर वाला गेमिंग लैपटॉप खरीदने की क्या सनक सवार थी? क्या सरपंच साहब या सचिव जी ऑफिस के समय में कमरे का दरवाजा बंद करके हाई-एंड वीडियो गेम खेल रहे थे, या 3D रेंडरिंग और वीडियो एडिटिंग का कोई प्राइवेट धंधा चला रहे थे?

जब जनपद या जिला स्तर पर सरकारी ऑडिट की तलवार लटकेगी, तब इन कागजों का हिसाब कौन देगा? इस तरह की फिजूलखर्ची पर जब ऑडिट टीम कड़ी आपत्ति लेगी, तब कौन सा मुंह लेकर जवाब दोगे? क्या सिस्टम के इन जिम्मेदारों को कानून और जनता के प्रति जवाबदेही का कोई खौफ नहीं बचा है? या फिर 'ऊपर से नीचे तक' सब इसी लूट में हिस्सेदार हैं?

सोचिए एक तरफ वो लोग हैं जो बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, और दूसरी तरफ वो लोग हैं जो पंचायत के बजट से ऐसे गेमिंग लैपटॉप खरीद रहे हैं जिन पर शायद गांव के गरीब बच्चों ने कभी सपने में भी हाथ न लगाया हो।

लड्डू से शुरू हुई कहानी अब लैपटॉप तक आ पहुंची है। सवाल यह नहीं है कि दुकान का नाम 'ऑल इन वन' क्यों है; असली सवाल यह है कि हमारे देश के इन छोटे-छोटे पावर सेंटरों पर बैठे लोग, जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह लुटवाने का लाइसेंस लेकर कहां से आते हैं?

क्या इस मामले में कोई उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होगी, या हमेशा की तरह फाइलों पर पर्दा डालकर इस खेल को भी दफ़न कर दिया जाएगा?

Stringer24 रिपोर्ट
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