जनपद की छत्रछाया में पंचायत का खेल?
ग्राम पंचायत सिरसिरी में बिलों का बवंडर, जिम्मेदार मौन क्यों?
साईखेड़ा जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सिरसिरी इन दिनों गांव-गांव में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। चौपाल से लेकर हाट-बाजार तक एक ही सवाल गूंज रहा है — “काम आधा, पैसा पूरा… आखिर ये खेल किसके इशारे पर?”
ग्रामीणों का कहना है कि कई बिलों में काम का स्पष्ट विवरण तक नहीं, फिर भी भुगतान की मुहर लग जाती है। किस मद में कितना पैसा निकला, किस काम पर खर्च हुआ — इसका सीधा जवाब किसी के पास नहीं।
🧾 फाइलों में विकास, जमीन पर सन्नाटा?
कागजों में विकास की लंबी सूची दिखाई देती है, लेकिन मौके पर जाकर तस्वीर कुछ और नजर आती है — कहीं अधूरा निर्माण, कहीं काम शुरू ही नहीं, फिर भी भुगतान की एंट्री पूरी।
ये बातें फिलहाल स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवाल और आरोप हैं। लेकिन अगर इसमें सच्चाई नहीं है, तो जिम्मेदार अधिकारी खुलकर सामने क्यों नहीं आते?
👀 क्या निगाहें जानबूझकर झुकी हैं?
जनपद स्तर पर हर बिल की तकनीकी और वित्तीय जांच की जिम्मेदारी तय है। फिर अधूरी जानकारी वाले दस्तावेज कैसे स्वीकृत हो रहे हैं? क्या फाइलें बिना पढ़े आगे बढ़ रही हैं? या फिर जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?
⚖️ जनता का पैसा, जनता का हक
ग्रामीणों की मांग साफ है —
- पिछले एक वर्ष के सभी विकास कार्यों की सूची सार्वजनिक हो।
- भुगतान किए गए बिल ग्रामसभा में पढ़कर सुनाए जाएं।
- भौतिक सत्यापन कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
यह केवल एक पंचायत का मुद्दा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो जनता के पैसे से चलती है।
और अगर सही हैं — तो जवाबदेही तय कीजिए।
अब गांव जाग चुका है…
फाइलों की धूल झाड़कर सच बाहर लाना ही होगा।

