कभी दुकानदार बना दिया तो कभी दैनिक मजदूर?
ग्राम पंचायत सुपला, जिला नरसिंहपुर
ग्राम पंचायत सुपला में सामने आया एक ऐसा मामला, जिसने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में मुकेश यादव नामक व्यक्ति को कभी दुकानदार तो कभी दैनिक मजदूर दर्शाया गया — वह भी अलग-अलग बिलों में।
एक ही नाम, दो पहचानें — सवाल यह है कि गलती है या घोटाले की तैयारी?
🔍 दो बिल, दो अलग-अलग सच?
प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार, मुकेश यादव के नाम पर पंचायत द्वारा दो अलग-अलग बिल लगाए गए हैं। एक बिल में उसे मजदूर बताया गया है, जबकि दूसरे बिल में वही व्यक्ति दैनिक मजदूर के रूप में दर्ज है।
सबसे अहम सवाल यह है कि यदि संबंधित व्यक्ति पेशे से दुकानदार है, तो उसे सरकारी कार्यों में मजदूर के रूप में क्यों दर्शाया गया?
❓ लापरवाही या सुनियोजित हेरफेर?
क्या यह केवल कागजी लापरवाही है? या फिर पंचायत के रिकॉर्ड में जानबूझकर हेर-फेर कर भुगतान निकालने की कारिस्तानी की गई है?
यह मामला सीधे तौर पर पंचायत की कार्यप्रणाली, निगरानी तंत्र और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।
यदि एक व्यक्ति की पहचान ही बदल दी जाए, तो फिर पंचायत के अन्य भुगतान कितने भरोसेमंद हैं?
📌 जांच की उठी मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और दस्तावेज़ी जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि:
- मुकेश यादव का वास्तविक पेशा क्या है?
- दो अलग-अलग बिल किस आधार पर बनाए गए?
- भुगतान किसके आदेश पर किया गया?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक ग्राम पंचायत सुपला का यह मामला संदेह के घेरे में बना रहेगा।
