🧹 व्यंग्य विशेष रिपोर्ट : “कलेक्टर साहब की उपलब्धियाँ — जो दिखती नहीं, वही सबसे बड़ी हैं!”
जिले में सफाई की स्थिति इतनी “बेहतरीन” है कि सड़कों पर कचरे का स्वागत द्वार बना हुआ है।
पंप हाउस के पास पानी की बर्बादी से लेकर चौक-चौराहों पर उफनते कूड़े तक — यह सब कलेक्टर साहब के “विकास दृष्टिकोण” का ही तो प्रमाण है!
ट्रैफिक व्यवस्था? पूछो मत!
यहाँ रेड लाइट सिर्फ सजावट के लिए होती है — बाकी जनता और वाहन मिलकर “सड़क नृत्य” करते हैं।
हेलमेट पहनने वाला अब दुर्लभ प्राणी माना जाता है, और नियमों का पालन करने वाला “शक के घेरे में” आ जाता है।
नशा-मुक्ति अभियान चल रहा है,
बस फर्क इतना है कि नशा-मुक्ति केंद्र से पहले गली में नशा बिकता है!
छात्र भी अब “कोर्स प्लस कोकीन” पैकेज में पढ़ाई कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार का स्तर तो ऐसा है कि अब तो रिश्वत पर भी GST लगना चाहिए!
फाइल तभी आगे बढ़ती है जब “चाय पान” की सुगंध कमरे में फैल जाए।
और इन सबके बीच कलेक्टर साहब व्यस्त हैं —
किसी नए सम्मान समारोह में *“बेस्ट एडमिनिस्ट्रेशन अवार्ड”* लेने की तैयारी में! आखिर मेहनत भी तो बहुत की है — जनता को “आवाज़ उठाने” का अभ्यास करवा दिया!
जनता अब सवाल नहीं पूछती, बस कहती है —
“साहब, कुछ मत कीजिए... बस ऐसा ही रहने दीजिए, ताकि इतिहास में मिसाल बने कि सिस्टम भी कितनी शांत नींद सो सकता है!”
✍️ रिपोर्ट: Stringer24News ब्यूरो
🎙️ पंचायत रेडियो विशेष व्यंग्य अंक
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