*मित्रता दिवस: दोस्ती के चेहरे*
(एक सामयिक व्यंग्य -सुशील शर्मा)
मित्रता दिवस फिर आ गया है। सोशल मीडिया पर #BestFriendForever, #FriendshipDaySpecial और #DostiZindabad जैसे हैशटैग आकाश में ऐसे उड़ रहे हैं मानो दुनिया की सारी दोस्ती इसी एक दिन में सिमट आई हो।
लोग अपनी पुरानी तस्वीरें खंगाल रहे हैं, कैप्शन में दिल के इमोजी डाल रहे हैं, और कुछ तो ऐसे "बेस्ट फ्रेंड" को टैग कर रहे हैं जिससे पिछली बार मुलाकात तब हुई थी जब पेट्रोल का दाम चालीस रुपये था।
कहते हैं, दोस्ती इंसान की सबसे बड़ी पूँजी होती है।लेकिन इस डिजिटल युग में दोस्ती की परिभाषा भी वैसी ही हो गई है जैसी खाने में इंस्टैंट नूडल्स दो मिनट की गर्माहट और फिर खाली कटोरा।तो आइए, इस मित्रता दिवस पर झाँकते हैं उन "दोस्तों" की असलियत में, जिनके बिनाहमारी नोटिफिकेशन तो अधूरी रह सकती है, पर जिंदगी शायद और भी सुकूनभरी हो।
*1. सेल्फी दोस्त — कैमरे में दोस्ती, ज़िंदगी में गायब*
ये दोस्त हर जगह मौजूद मिलेंगे बशर्ते कैमरा ऑन हो।इनकी दोस्ती का पैमाना है आपकी तस्वीर में कितनी बार इन्हें टैग किया गया।कभी आप सोचते हैं कि आज अकेले कॉफ़ी पी लेंगे, तभी अचानक ये प्रकट होंगे और कहेंगे,“अरे चलो ना, एक सेल्फी ले लेते हैं। आज की फ्रेंडशिप वाली।”
और जैसे ही फोटो अपलोड हो गई, ये ऐसे गायब हो जाते हैं जैसे कभी थे ही नहीं।
आपकी बीमारी की खबर पर इनके मोबाइल की बैटरी हमेशा खत्म रहती है, पर आपकी इंस्टा स्टोरी पर रिप्लाई करने का चार्ज हमेशा फुल।
*2. टैग दोस्त — नोटिफिकेशन का आतंक*
इनके बिना आपकी फेसबुक वॉल अधूरी रहती है।सुबह उठते ही देखते हैं 17 नोटिफिकेशन, और हर जगह आपका नाम।कभी "तेरा चेहरा किस फल जैसा है", कभी "तेरी लाइफ का गाना कौन-सा है", और कभी "अगर तू जानवर होता तो कौन-सा होता?"आप चाहें तो ब्लॉक कर दीजिए, लेकिन अगले दिन ये नए अकाउंट से वापस आकर फिर टैग कर देंगे।इनकी दोस्ती का मकसद आपका चेहरा हर मीम पर चिपकाना है।वो भी ऐसा मीम जिस पर आपकी बीवी या मम्मी की नज़र पड़ते ही आप कोने में खड़े हो जाएँ।
*3. मतलबी दोस्त — काम का पक्का ग्राहक*
इनकी दोस्ती का नियम बड़ा सीधा है "काम पड़े तो याद करो, काम निकल जाए तो भूल जाओ।"
जब तक आपकी जेब में कुछ ताक़त है या हाथ में कोई पहचान है, तब तक आप इनके "जिगरी यार" हैं।पर जैसे ही आपकी हालत पतली हुई, ये दोस्त ऐसे खिसक जाते हैं जैसे मोबाइल से पुराना ऐप डिलीट हो गया हो।आप सोचते हैं, मुसीबत में ये साथ देंगे। पर मुसीबत आने पर यही कहते मिलेंगे“यार, मैं तो सोच रहा था तुझे मदद करूँ, पर देख न, खुद की हालत भी ठीक नहीं है।”मतलब मदद शून्य और तसल्ली की लाइनें फ्री में।
*4. उधार दोस्त — रिश्तों का परमानेंट लोन*
ये वो हैं जो आपके बैंक अकाउंट को अपना मान बैठते हैं।
“बस दो दिन के लिए पैसे दे दे, फिर लौटा दूँगा।”वो दो दिन आपके कैलेंडर में कभी नहीं आते।पैसे के साथ-साथ किताबें, कपड़े, गाड़ी, और कभी-कभी दिमाग भी उधार ले लेते हैं।और जब आप पैसे माँगते हैं तो ऐसे मुँह बनाते हैं मानो आपने उनकी इज़्ज़त माँग ली हो।ये दोस्ती नहीं, एक अदृश्य ईएमआई है जो कभी खत्म नहीं होती।
*5. ज्ञानी दोस्त — चलता-फिरता प्रवचन केंद्र*
आप सोचते हैं कि दिल हल्का कर लेंगे, पर इनके पास जाते ही आपका सिर भारी हो जाता है।
आप कहेंगे, “यार, मेरा ब्रेकअप हो गया।”ये कहेंगे, “मैंने तो तुझसे पहले ही कहा था। तूने मेरी बात मानी होती तो ये दिन न देखना पड़ता।”मतलब न तो दिलासा, न सहारा बस आपको बेवकूफ साबित करने की कला।इनसे बात करने के बाद लगता है कि दुख कम और अपराधबोध ज्यादा मिल गया।
*6. राजनीतिक दोस्त — दोस्ती की सत्ता की बाज़ीगर*
ये दोस्त दरअसल मित्र नहीं, बल्कि चुनावी उम्मीदवार हैं।
एक के सामने दूसरे की बुराई, दूसरे के सामने पहले की चुगली।
इनका असली आनंद तब है जब आप और आपका दूसरा मित्र आपस में भिड़ जाएँ और ये बीच में पंचतंत्र की लोमड़ी की तरह मुस्कुराते रहें।कभी आपको एहसास भी नहीं होता कि आपकी दोस्ती की नाव का छेद इन्हीं के हाथों से हुआ है।
*7. फॉरवर्ड दोस्त — व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर*
सुबह उठते ही आपका मोबाइल घंटी बजाता है
"सुप्रभात 🌸🌞"
उसके बाद“अगर ये मैसेज 11 लोगों को फॉरवर्ड नहीं किया तो तुम्हारी किस्मत खराब हो जाएगी।”आपको लगता है शायद ये संदेश आपकी भलाई के लिए है। पर असल में, ये आपकी नींद खराब करने की एक साजिश है।
इनकी दोस्ती का पैमाना है कितने मीम, चुटकुले और "जय श्री राम" वाले मैसेज भेजे गए।
*8. गायब दोस्त — दोस्ती की गूगल ड्राइव*
इनकी खासियत है कि जब आप उन्हें सचमुच ढूँढ रहे हों, तब ये ऑफलाइन रहते हैं।
लेकिन साल भर बाद अचानक प्रकट होंगे“अरे भाई, कितने दिन हो गए, याद किया कि नहीं?”
और फिर पूछेंगे “वैसे, थोड़ा उधार मिल सकता है?”यानि दोस्ती का पूरा एलबम गूगल ड्राइव में सेव है, जरूरत पड़ते ही डाउनलोड हो जाता है।
*सच्चे दोस्त — भीड़ में मोती*
जो हर उम्र और हर हालात में जीवन को संबल देते हैं
दोस्तों, इस भीड़ में कुछ ऐसे भी होते हैं जो दिखावे के नहीं, दिल के रिश्ते निभाते हैं।
*1. संकटमोचक दोस्त — कठिन समय के सच्चे साथी*
ये वही होते हैं जो आपकी खुशी से अधिक आपके दुख में खड़े होते हैं। बीमारी, आर्थिक संकट, या भावनात्मक टूटन इनकी मौजूदगी किसी दवा से कम नहीं।इनका महत्व इसीलिए है कि जब पूरी दुनिया पीठ फेर ले, तब ये आपके लिए दीवार बन खड़े हो जाते हैं।
*2. मौन समझने वाले दोस्त — शब्दों से परे का रिश्ता*
इनसे आप कुछ कहें या न कहें, ये आपकी आँखों से आपकी पीड़ा पढ़ लेते हैं।ये आपके साथ बैठकर बिना बोले भी आपको यह अहसास दिलाते हैं कि आप अकेले नहीं हैं।
*3. आलोचक दोस्त — सच्चाई का आईना*
ये आपकी गलतियों पर पर्दा नहीं डालते, बल्कि आपको आईना दिखाते हैं।इनकी आलोचना कटु नहीं, बल्कि सच्ची होती है जो आपको गिरने से बचाती है और सही राह दिखाती है।
*4. प्रोत्साहक दोस्त — सपनों का साथी*
ये वही होते हैं जो आपकी हर छोटी-बड़ी उपलब्धि पर तालियाँ बजाते हैं।आपके सपनों को सुनकर हँसते नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए आपको ताक़त देते हैं।
*5. बचपन के दोस्त — मासूम यादों का ख़ज़ाना*
समय चाहे जितना भी बीत जाए, इनसे मिलकर ऐसा लगता है मानो बचपन लौट आया होइनकी संगत में कोई दिखावा नहीं, सिर्फ़ सहज अपनापन होता है।
इस मित्रता दिवस पर हमें यह सोचना होगा कि हम किस प्रकार की दोस्ती निभा रहे हैं और किसे दोस्त कह रहे हैं।क्या हमारी मित्रता सिर्फ़ "सेल्फी" और "टैग" तक सीमित है?या फिर हमारे पास ऐसा कोई है जो हमारी खुशी और दुख दोनों में बराबर का सहभागी है?सच्चे दोस्त वही हैं जो हमारे जीवन में आई आँधियों के सामने ढाल बन खड़े हों,जो हमारी असफलताओं में हमें गले लगाएँ,और जो बिना सोशल मीडिया पर पोस्ट किए भी हमारे जीवन को रोशन कर दें।
दोस्तों, मित्रता दिवस पर।अगर आपके पास ऐसा कोई है जो बिना कैमरे के भी आपके साथ बैठ सके,जो बिना टैग किए भी आपकी चिंता करे,जो आपकी हार में आपके साथ रोए और आपकी जीत में सचमुच खुश हो तो समझ लीजिए आपने खज़ाना पा लिया है।
बाकी सब दोस्ती के नाम पर बस डिजिटल फिल्टर हैं,जो तस्वीर तो सुंदर बनाते हैं, पर रिश्ते धुंधले कर देते हैं।
सुशील शर्मा
