पोडार गांव का लाल बना देश का लाल:
सालीचौका गाडरवारा-करने को आदमी अगर उतारू हो जाए तो क्या न कर दे यही काम किया है कम जन वाले छोटे ग्राम पोडार से जहां पर महज पांचवी तक की शिक्षा ही मिलती है।
लेकिन अपने आप को अगर कहीं स्थापित करना है तो उसके लिए अलग से जतन,मेहनत करनी पड़ती है।
यही सब मेहनत और लगन उसको देश के उस स्थान पर ले गई जो बहुत ही कर्मठता,बहुत ही लगन और बहुत ही संयम के कारण मिल पाता है।
हां जी नजदीकी ग्राम पोडार जो की आदिवासियों से भरा हुआ गांव है इसी गांव में एक आदिवासी पुत्र जिसका नाम सुरेंद्र सिंह ठाकुर पिता मंगल सिंह ठाकुर,गरीबी और मजबूरियों के बीच से जिस तरह से पढ़ाई और सीआरपीएफ की तैयारी उस लड़के ने कि वह मुश्किल ही कोई कर पाता।
कम साधन संसाधन यहां तक कि वह सभी चीज ना होना जिनकी इसमें आवश्यकता थी।
सड़कों पर दौड़कर,खुले में जरूरी व्यायामों कामों को करके।
आगे की शिक्षा के लिए 20 किलोमीटर तक साइकिल और अन्य वाहनों से सफर तय करके आज उस बेटे ने यह साबित कर दिया कि संसाधन उतने जरूरी नहीं है जितना सफलता के लिए प्रयास मन में होना चाहिए।
और वह बन गया गांव के लाल से देश का लाल जी हां सीआरपीएफ की जब वर्दी पहनकर वह गांव में आया तो गांव के उसकी उम्र के लड़के दोस्त बड़े बुजुर्ग महिला बच्चे रिस्तेदार सभी में एक देश प्रेम का जज्बा जाग गया।
और उसने साबित करके जो दिखाया है वह यही के इस मिट्टी से उठकर देश की मिट्टी के लिए कुछ किया जा सकता है।
समस्त लोगों ने उसे बधाई और शुभकामनाएं दी और उसे गांव में पहली बार कोई व्यक्ति गांव से बाहर जाकर देश के लिए ऐसा काम करेगा तो सचमुच शिक्षा ही वह है कारण है जिससे हम यह सब प्राप्त कर सकते हैं।
जो लोग कहते हैं कि शासकीय स्कूलों में क्या रखा है गांव-गांव शासन के प्राथमिक स्कूल हैं इसे क्या मिल रहा है।
अगर आज ग्राम पोडार में प्राथमिक स्कूल नहीं होता तो क्या ऐसा देश का लाल भी निकलता निश्चित ही हम सभी को शिक्षा की ओर और अपने लक्ष्य की ओर ध्यान देना चाहिए।
पुनः सुरेंद्र ठाकुर पिता मंगल सिंह ठाकुर एवं समस्त पोडार निवासियों को इस गौरवपूर्ण पल की ढेर सारी शुभकामनाएं दी जा रही हैं
