ग्राम पंचायत बेलखेड़ी:जनपद गोटेगांव:नरसिंहपुर
जैसे ही आप बेलखेडी गांव में प्रवेश करते हैं,चारों तरफ गंदगी,दूषित पानी की सड़कों पर निकासी के दृश्य देख सकते हैं। गांव में चारो तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
पंचायत प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण गंदगी का अंबार लगा है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। गांव में सफाई नहीं कराए जाने से जगह जगह गंदगी के ढेर लगे हैं और नाले-नालियां जाम होने से गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है।
ग्राम पंचायत द्वारा नालियों का निर्माण तो किया गया, लेकिन इनकी साफसफाई नहीं कराई जाती। हालात बिगडऩे पर ग्रामीणों को खुद मैदान में उतरना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा सफाई का कहने पर सरपंच एवं सचिव द्वारा इसके लिए फंड एवं कर्मचारी ना होने की बात कह कर टाल दिया जाता है।
दिनोंदिन समस्या बढ़ती जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से गांव-गांव में स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत रथ एवं रैली निकालकर स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। इस संबंध में कई बार ग्रामीणों की ओर से सरपंच को अवगत करवाने के बावजूद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है!
गंदगी के अंबार से जहां मच्छरों को प्रकोप बढ़ रहा हैं, वहीं संक्रामक रोगों को फैलने का खतरा बढ़रहा हैै। ग्रामीणों का आरोप हैं सफाई न होने के चलते उन्हें मजबूरन निजी खर्चे पर साफ सफाई कराना पड़ रहा है।समय-समय पर ग्रामीण अपने ही झाडू उठा सफाई के लिए मजबूर हैं। समस्या से विभागीय अधिकारी भी वाकिफ हैं, पर इससे निजात नहीं मिल पा रही है।
विकासखंड मुख्यालय से करीबी गांवों में ही जब ऐसे हालात हैं, तब इस स्थिति में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य गांवों में क्या स्थिति रहती होगी।विकासखंड के कई ग्रामों मे यह अव्यवस्थाएं पसरी हुई हैं, जिनकी स्थिति सुधारने के लिए विभागीय अधिकारियो को भी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है, ताकि गांव भी शहरो की तरह साफ और स्वच्छ हो सकें।स्वास्थ्य विभाग ग्रामीणों को साफ-सफाई के लिए जागरूक करता आ रहा है। बावजूद इसके गांवों के मुख्य मार्ग और घरों के आसपास पसरी गंदगी को खत्म करने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही।
जारी :
प्रदेश शासन ने ग्राम पंचायत को सुबह 11 से शाम 5 बजे तक खुली रखने के आदेश जारी किए थे। बावजूद जनपद पंचायत गोटेगांव की कुछ पंचायतों को छोड़ दिया जाए तो एक भी पंचायत शाम 5 बजे तक खुली नहीं रहती है।पंचायत सचिव व सहायक सचिव गांव तो पहुंचते हैं लेकिन अपना काम पूरा कर लौट आते हैं। ग्रामीणों की समस्या से रूबरू नहीं होते।
बेलखेड़ी गांव के लोग काफी समय से अपनी समस्याओं के हल होने की राह देख रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याएं अधिकारियों तक नहीं पहुंच पा रहीं। इसका मुख्य कारण जनसुनवाई के दिन पंचायत भवन का न खुलना है। जनसुनवाई के दिन मंगलवार को पंचायत भवन बंद रहता है। जनसुनवाई के लिए आने वाले ग्रामीण वापस लौट जाते है। यही नजारा 27 अगस्त दिन मंगलवार को ग्राम पंचायत बेलखेड़ी में देखने को मिला।
यहां ना सिर्फ पंचायत भवन पर ताला लटका हुआ दिखाई दिया,बल्कि पंचायत भवन पर पूरी तरह से आवारा श्वानों और गौ वंश का कब्जा दिखाई दिया। गौ और श्वानो के मल मूत्र से पंचायत परिसर में चारों तरफ गंदगी फैली हुई थी,गंदगी के ढेर बता रहे थे कि,पंचायत का ताला कई दिनों से नहीं खुला है।सरपंच ममता बेलखेड़ी में रबर स्टाम्प से अधिक कुछ प्रतीत नहीं होती,ग्रामीण सरपंच के इस उदासीन रवैए के चलते परेशान है।
वहीं जब यात्री प्रतिक्षालय की हालत देखी तो वहां भी साफ सफाई का नामो निशान नहीं मिला, प्रतिक्षालय में श्वानोंं और गौ वंश के मलमुत्र के कारण परिसर में बैठना संभव नही था।यहां सांस लेना भी दुभर हो रहा था। यह है बेलखेड़ी ग्राम पंचायत की कार्यशैली?जहा यात्री धूप,बरसात में खुले में खड़े होकर वाहनों की प्रतिक्षा करने के लिए मजबूर हैं,और सरपंच को ग्रामीणों को होने वाली असुविधाओंं से कोई मतलब नहीं है!
सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को भी वेतन के साथ मिलने वाले कमीशन से मतलब हैं?ग्रामीणों ने बताया कि जनसुनवाई के दिन पंचायत भवन बंद रहता है जिसके कारण यहां की जनता को शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी व लाभ नहीं मिल पाता है।ग्राम पंचायत में जनसुनवाई होना दूर की बात, पंचायतों के ताले तक नहीं खुल रहे है। ऐसे में पंचायत स्तर पर जन की सुनवाई होने की उम्मीद किसी मजाक से कम नहीं लग रही है।
राज्य सरकार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पंचायत मुख्यालय में सरपंच को उपस्थित रहना होगा। राज्य सरकार के आदेशानुसार स्पष्ट किया कि सरपंच स्वयं प्रतिदिन तय समय में कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। यदि कुछ सरपंच लगातार तीन दिन तक कार्यालय से अनुपस्थित रहे तो पंचायत सचिव द्वारा इसकी लिखित सूचना विकास अधिकारी तथा जिला परिषद के नियंत्रण कक्ष में नोट कराई जाएगी।लेकिन बेलखड़ी सचिव द्वारा सरपंच ममता के विरुद्ध कोई सूचना विभाग को नहीं दी गई?जाहिर सी बात है की ममता तो सिर्फ नाम की सरपंच हैं!





