*महाविनाश की भविष्यवाणी : धरती हो जायेगी तबाह?*
।। रविवारीय विशेषांक।। : ।। व्यंग्य।।
क्या कहा आपने इस बार देश के विभिन्न हिस्सों में पारा पचास के पार चला गया? बढ़ते तापमान की वजह से लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और अनगिनत बच्चे/महिलाएं बेहोशी और लू का शिकार हुए!लोग तो सोशल मीडिया पर कह रहे हैं की इसके लिए इंसान खुद जिम्मेदार है! पेड़ लगाना चाहिए!
खैर किसी की जान जाती हो हमारी बला से! हम क्यों चिंता करें कि बेतहाशा जंगल कट रहे हैं और इसके लिए व्रक्षा रोपण किया जाना चाहिए? देखो भाई जंगल बचाने के लिए है ना वन विभाग का अमला!हमें चिंता करने की जरूरत क्या है?जब सरकार करोड़ों रुपए वन विभाग पर खर्च कर रही है तो फिर वन माफिया से हम क्यों टकराएं?और फिर पेड़ लगाने की पेड़ बचाने की ठेकेदारी हमारी है क्या?जंगल कोई काटे,सरकार से तनखा कोई ले और फोकट की ठेकेदारी करें हम! अरे वाह,क्या जमाना आ गया है?
लोग मर रहे हैं,जंगल कट रहे हैं,इसके लिए भला हम जिम्मेदार हैं क्या?हमने थोड़े ही कहा था,जंगल काटो!और सरकार करती तो हैं ना व्रक्षा रोपण!कितनी फोटो खिंचवाई जाती हैं,कितने लाखो करोड़ों रुपए खर्च हो जाते हैं?फिर भी पर्यावरण असंतुलन की बात करते हो!और भैया नेता तो नेता है,पेड़ कागज में लगाए या जमीन पर,नेता से कौन क्या कह सकता है? हालाकि कहने वाले कहते हैं की,सरकारी पैसे में गबन किया जाता है व्रक्षा रोपण के नाम पर!पर कहने से क्या होता है?
और रही बात महाविनाश की,तो इस महा विनाश से डरता कौन है?और सुना नही क्या वो एक मशहूर फिल्म का डायलॉग? आज उनकी तो कल हमारी बारी है, मौत से किसकी यारी है? एक दिन तो सबने ही जाना है!फिर क्या इतना घबराना है?और फिर अकेले मरने में ज्यादा डर लगता है! कम से कम साथ में मरो तो मृत्यु ज्यादा डरावनी नही लगेगी! कम से कम इतना सुकून तो रहेगा की अकेले नहीं मरे!
आप लोग तो बेवजह छोटी छोटी बातों का हौआ बना देते हैं! महा विनाश आएगा!कैसी कैसी बेतुकी बातें है? धरती को बचाना है! अरे हम चलती बस में , भीड़ भरी ट्रेन में, खुलेआम बाजार में लड़की का रेप होने पर उसे बचाने नही जाते हैं तो धरती को बचाने कहां से जाएं? यहां हम इंसान और इंसानियत बचाने नही जा रहे हैं और तुम पेड़ लगाओ धरती बचाओ जैसी बातें कर रहे हो!