*सुभाष पार्क चौराहे का सौंदर्यीकरण कब?: स्ट्रीट मार्केट को व्यवस्थित करने की दिशा में क्या कर रहा है प्रशासन?:नरसिंहपुर।*
।। विवेचना।।
सुभाष पार्क चौराहे की दुर्दशा पर शायद ही जिम्मेदारों का ध्यान जाता हो?अन्यथा आज शहर का प्रमुख चौराहा अपनी दुर्दशा पर आसूं नही बहा रहा होता! चौराहे के आसपास भीड़ लगी रहती है।यहां लोग अल।सुबह से लेकर देर शाम तक राजनीतिक चर्चा करते रहते हैं।दिनभर गाड़ियों की आवाजाही लगी रहती है,लेकिन इतने व्यस्त चौराहे का सौंदर्यीकरण अभी तक नहीं होना स्थानीय निवासियों को अखरता है।कई सांसद, विधायक आये और चले गये, लेकिन इस चौक के सौन्दर्यीकरण के लिए किसी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
वहीं शहर में सड़कों किनारे फुटपाथ पर लगने वाले अव्यवस्थित स्ट्रीट मार्केट को व्यवस्थित और सुंदर बनाने के लिए प्रशासन के पास कोई ठोस योजना नही है?ऐसा प्रतीत होता है!
देखिए सड़क किनारे रेहड़ी/स्टॉल/ठेला लगाने वाले शहर की खुबसूरती पर बदनुमा दाग नही है,बल्कि ये तो शहर की अर्थव्यवस्था का मुख्य हिस्सा हैं!हालाकि उचित दिशा निर्देशों के अभाव में ये छोटे व्यापारी फुटपाथ पर बेजा अतिक्रमण कर लेते हैं,जिससे पैदल चलने वाले राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है,हालाकि इसके लिए इन व्यापारियों को समझाइश दी जा सकती है,या फिर जुर्माना लगाया जा सकता है!
यदि प्रशासन स्ट्रीट मार्केट के लिए शहर में कुछ स्थानों को चिन्हित कर स्ट्रीट मार्केट को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाए तो ना सिर्फ शहर की खुबसूरती में इजाफा होगा बल्कि इन छोटे व्यापारियों की आया में भी वृद्धि होगी और प्रशासन एवम स्थानीय नागरिकों के साथ ही पैदल चलने वालों को अराजक यातायात से मुक्ति मिलेगी,और जाम जैसी स्थितियां निर्मित नही होंगी!
इस तरह से काफी समायाओं पर काबू पाया जा सकेगा!लेकिन इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को दूरगामी परिणामों को देखते हुए शहर के प्रमुख स्थलों को चिन्हित करना होगा!
मुख्य मार्गों पर लगे डिवाइडरों पर सौंदर्यीकरण की कड़ी में पौधे लगाने का कार्य शुरू किया जाना चाहिए।कुछ जगहों पर पौधे लगाए गए, लेकिन उनकी सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध नहीं किए जाने के कारण पशुओं ने पौधों को विकसित होने से पूर्व ही नष्ट कर दिया।पेड़ों की वजह से सड़कों पर प्रदूषण को कम करने में भी सहायता मिलती है।
पेड़ पौधों से भी ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है। दरअसल, सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों से इतना ज्यादा ध्वनि प्रदूषण होता है कि अगर इनके अगल-बगल पेड़ पौधे ना हों तो यह आसपास रहने वाले लोगों को बहरा कर दें।
जारी :