*पंचायत में गबन के मामलों में प्रदेश में अव्वल स्थान पर नरसिंहपुर जिला?*
नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायतों के विकास की सच्चाई यह है की, यहां पर गांवों की तस्वीर शासन द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों से भले ही न बदली हो, लेकिन स्वीकृत बजट में धांधली करके सरपंच सचिव और जीआरएस का रहन सहन और रूआव जरूर बदल गया है।
हालाकि, आमतौर पर कुछ विकास कार्य कराके धांधली के चर्चे तो आम हैं, लेकिन कई ऐसे मामले भी हैं जिनमें काम कराए बिना ही राशि को स्वीकृत कराकर हड़प लिया गया।
ग्राम पंचायत रीछा जनपद गोटेगांव अंतर्गत सचिव पावेल सराठे की करतूत और अधिकारियों की मिलीभगत से हुए जिले के सबसे बड़े घोटाले इसके उदाहरण है,और सिर्फ यही एक पंचायत नही है, इसके अलावा भी अनेक ग्राम पंचायतों में इस तरह की कारस्तानी की है!हालाकि बड़ी मशक्कत के बाद स्थानीय जिला प्रशासन ने दिखावे की कार्यवाही करते हुए, गबन के सबसे छोटे मोहरे (जीआरएस) को बली की भेंट चढ़ाया गया, सेवा समाप्ति और एफआईआर दर्ज किए जाने की बनावटी कार्यवाही की गई और पंचायत पर रिकवरी निकाली गई।
ग्राम पंचायत पलेरा जनपद चिचली के ग्रामीणों ने जीआरएस पर अपने परिवार वालों को अवैधानिक तरीके से लाभ दिए जाने का आरोप लगाया, करेली जनपद अन्तर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सिमरिया कला में ग्रामीण ने सरपंच पति पर जलकर चोरी करने का आरोप लगाया,गोटेगांव जनपद अन्तर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सिवनी बंधी में खुद सरपंच पति ने स्वीकार किया कि पंचायत महिला सरपंच नही कोई और चला रहा है, वहीं चिचली जनपद अन्तर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बारहाबड़ा में भी सरपंच पर ग्रामीणों ने हेर फेर के गम्भीर आरोप लगाए,इतना ही नही ग्राम पंचायत भैरोपुर में भी सरपंच और सचिव पर अनियमितता किए जाने के गम्भीर आरोप ग्राम वासियों ने लगाए।
इस तरह के आरोप लगाकर ग्रामीणों ने जपं सीईओ, जिपं सीईओ व कलेक्टर से इसकी शिकायत की पर नतीजा वही हुआ जो हमेशा होता है जांच के नाम पर लेनदेन किया गया और जांच को फाइलों में दबा दिया गया।
यह ग्राम पंचायतें तो उदाहरण मात्र है,अनेक ग्राम पंचायतें ऐसी हैं,जहां खुलकर गबन का खेल खेला गया और जनपद अधिकारियों की नजर सिर्फ लिफाफे और कमीशन पर रही? जनपद अधिकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि,भ्रष्टाचार की शिकायतों को ना सिर्फ दबाया जाता है बल्कि शिकायत कर्ताओं को भी डरा धमकाकर अथवा प्रलोभन के जरिए मामले को रफा दफा कर दिया जाता है! ग्राम पंचायत बारछी हो या ग्राम पंचायत धुरसुरू या फिर ग्राम पंचायत घाट पिंडरई या ग्राम पंचायत पटकुही हालात अधिकांश स्थानों पर बदहाल है।
अनेक सरपंच सचिव और जीआरएस ऑफ कैमरा यह स्वीकार कर चुके हैं की, जनपद अधिकारियों द्वारा गबन करने के लिए पंचायत पर दबाव बनाया जाता है।
यह सच्चाई सब जानते हैं कि जब तक ऊपर अधिकारियों का हाथ न हो तब तक निचले स्तर पर पंचायत प्रतिनिधि हेराफेरी नहीं कर सकते हैं और जब लाखों की हेराफेरी हो जाए उस पर अधिकारी खामोश बने रहें तो नीचे से ऊपर तक सबकी भूमिका पर सवाल उठने लगते हैं।
जांच के घेरे में आए पंचायत प्रतिनिधियों को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट को ही फाइलों में दबा दिया गया है।आरोपित सरपंच-सचिव के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही, इसका जवाब कोई नहीं दे रहा है।
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