*जिले के विकास की खोखली सच्चाई!:10साल में नहीं बन पाई बारछी- पलेरा क्वलारी नाले की पुलिया:नरसिंहपुर।*
।। विवेचना।।
सालीचौका।
पुलिया न होने से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। मजबूरी ऐसी है कि लोग कंधों पर बैठाकर बच्चों को स्कूल पहुंचाते हैं।
जिले में एक गांव आज भी विकास का इंतजार कर रहा है। पिछले दस साल से यहां एक पुल तक नहीं मिला।जब नाले में बाढ़ आ जाती है एवं बच्चे स्कूल जाते हैं, तो बच्चों के माता-पिता उन बच्चों को नाला को पार कराने उस पार और वापस भी लेन भी जाना होता है। जब बाढ़ की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो उन बच्चों को इस पार से उस पार कराना चुनौती भरा होता है जिस कारण अक्सर बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है।
अगर इस पर पुल बन जाता है तो सभी लोगों को सभी प्रकार की सुविधाएं आसानी से मिल सकती हैं, लोगों के काम आसानी से संपन्न हो सकते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को सुविधा आसानी से मिल सकती है। आदिवासी लोगों
नरसिंहपुर जिले में जनता की सेवा करने का ढिढौरा पीटने वाले नेता क्या सिर्फ मलाई खाने वाले नेता बचे हैं?
नरसिंहपुर के जिले के नेताओं से दस साल में एक पुलिया नहीं बन पा रहीं। नरसिंहपुर जिले के जनप्रतिनिधि, नेता मंचो पर बड़े-बड़े विकास के दावे करने वाले जमीनी सच्चाई तो देखें आ कर दैखें। यहां यह सवाल लाजिमी है कि नरसिंहपुर जिले में एक भी नेता, अधिकारी नहीं है क्या?
जो लगभग १० साल पहले पूर्व कलेक्टर सी बी चक्रवर्ती के कार्यकाल में बारछी- पलेरा पुलिया बनाने के लिए स्टीमेट बनाया गया, उस पर ध्यान दिया जाये, लेकिन उस पर आज दिनांक तक कोई काम नहीं करवा पाये क्षैत्रीय नेता, जिले के जनप्रतिनिधी और अधिकारी, नरसिंहपुर जिले के जबाबदेही कर्णधारो को बैटी आशिना कौरव और अन्य बैटीयों के आसू नहीं दिख रहे, जो तात्कालिक कलेक्टर सीबी चक्रवर्ती के सामने बहें थे और करुणामय स्यंम श्री चक्रवर्ती सहित पूरा पंडाल हो गया था।और आज भी उनके आशु अपनी पढाई को लेकर बह रहे है।
बारछी और पलेरा के बीच क्वलारी नदी की पुलिया कब तक बनवा पायेंगे, कब तक कुंभकरण की नींद में सोते रहेंगे नरसिंहपुर जिले के नेता और अधिकारी कब जाग पाएंगें।
पलेरा गांव से बारछी होते हुये सैकड़ों छात्र,छात्राएं बसुरिया सालीचौका 12वीं तक, तथा सालीचौका से ट्रेन द्वारा पिपरिया, गाडरवारा महाविद्यालय में पढने जाते हैं। वह सूखे यानि ठंड गर्मी में तो किसी तरह स्कूल कालेज चले जाते हैं लेकिन बरसात में सबसे अधिक कठिनाइयों के साथ जान जोखिम में डालकर अध्ययन करने जाना पडता हैं । हालांकि यह पलेरा गांव बारहाबडा-गाडरवारा से जुडा हुआ है लेकिन वहां से लगे स्कूल अत्यधिक दूर हैं।और इस कारण अभिभावक अपनी बैटीयों को उच्च शिक्षा नहीं दिला पा रहे। ग्रमीणों मे जनाक्रोश व्याप्त है।
जारी :
गतांक से आगे , , , ,
हालाकि पुलिया निर्माण का कार्य प्रारंभ , ,
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