*क्या आप वाकई महिलाओं की इज्जत करते हैं?*
उसने कम कपड़े पहने, इसलिए उनके साथ बलात्कार हो गया,लेकिन सच्चाई तो यह है कि उन औरतों का भी बलात्कार होता है जो साड़ियाँ पहनकर घूमती हैं।महिलाओं को आम ज़िंदगी में जिस तरह के यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, वह बेहद शर्मनाक है वह भी तब जब विश्व गुरु नारी पूजा के तमाम दावे करता हो!
किसी के मना करने के बावजूद उसे छूना, छूने की कोशिश करना, यौन संबंध बनाने की मांग करना, सेक्सुअल भाषा वाली टिप्पणी करना, पोर्नोग्राफ़ी दिखाना या कहे-अनकहे तरीके से बिना सहमति का सेक्सुअल बर्ताव करना, यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।
जब काम की जगह पर एक औरत के मना करने के बावजूद कोई मर्द उसे छूने की कोशिश करे, यौन संबंध बनाने की मांग करे या सेक्शुअल भाषा का इस्तेमाल कर टिप्पणियां करे तो उसे ऐसी हालत में क्या करना चाहिए?
हालांकि जब कोई महिला यौन उत्पीड़न शोषण या छेड़छाड़ के खिलाफ आवाज उठाती है तब अक्सर उसके आसपास उसे यह समझने की कोशिश भी की जाती है कि छेड़ा ही तो है रेप थोड़े ही किया है। यही वजह है कि अक्सर लोक लाज के भय से यौन उत्पीड़न और शोषण की शिकायतें महिलाएं करने में ही हिचकीचाती हैं?
सामाजिक रूढ़िवाद और यौन व्यवहार के बारे में कम जागरूकता की वजह से ऐसे हालात पैदा हुए हैं।घरेलू महिला कामगारों को कम वेतन देने, अधिक कामअपर्याप्त कराने और उनके साथ दुर्व्यवहार के मामलों की रिपोर्ट भी अक्सर सामने आती रहती है।
लेकिन अनेकों ऐसी महिला कामगार हैं जो अपने ऊपर होने वाले अन्याय को चुपचाप बर्दाश्त कर लेती हैं।महिलाओं के लिए ये दुनिया उतनी सरल है नहीं जितनी लोग कहते हैं। पहले वह घरों और स्कूलों में हिंसा और यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं और अब तो नौकरीवक्त भी उनको इसी दर्द से गुजरना पड़ रहा है।
आधुनिक समाज में महिलाएँ चाहे किसी भी वर्ग, जाति और शैक्षणिक स्थिति में हों, सुरक्षित नहीं हैं, महिलाएँ लंबे समय से अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में शारीरिक, सामाजिक, मानसिक और आर्थिक रूप से शोषण का शिकार होती आ रही हैं।यह महसूस किया गया है कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था में लंबे समय तक सभी मामलों में महिला पर पुरुष का वर्चस्व रहता है। भारत में महिला सशक्तिकरण को रोकने के लिए समाज अत्यधिक जिम्मेदार है।
।। समीक्षा ।।
जारी ;
कृषि में बड़ा योगदान देने बाली महिला खेत मज़दूरों का जैसे कोई अस्तित्व ही नहीं है।महिला खेत मज़दूरों की गंभीर और अलग समस्याएं है, जिनकी न तो पहचान की जाती है और न इसकी जरुरत समझी जाती है।महिला खेत मज़दूरों को न केवल आर्थिक भेदभाव और शोषण का सामना करना पड़ता है, बल्कि महिला होने के नाते यौन शोषण का भी शिकार होना पड़ता है।
