ग्राम पंचायत बंधी : ज. प. नरसिंहपुर : नर.।
नरसिंहपुर शहर से मात्र अट्ठाइस किलोमीटर दूर बसे बंधी गांव की बदतर हालत देखकर आपको एक बार तो यह सोचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा कि आखिर क्यों गांव अब तक विकास पथ पर आगे नहीं बढ़ पाया है किंतु जैसे ही आप गांव का जायजा लेने पहुंचते हैं स्थितियां स्वतः ही स्पष्ट हो जाते हैं।
गांव के कुछ हिस्सों में तो सड़क दिखाई देती है किंतु अधिकांश हिस्सों से या तो सड़क नदारद है या फिर जर्जर हालत में है।ढूंढना मुश्किल होता है की सड़क कहां है और गड्ढे कहां हैं!बरसात के दिनों में गांव की गलियों में कीचड़ होने से ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
नालियों की हालत भी बद से बदतर हो गई है।दूषित पानी घरों के बाहर सड़क पर दिनरात बहता रहता है।गांव में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।हैरानी होती है की लोकतंत्र और विकास की बात करने वाले जिले के गांव की हालत इतनी खस्ता है की ग्रामीणों को नरकीय जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की माने तो हालत इतने बदतर हैं की आज भी लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।हकीकत को जाना तो पता चला कि कुछ लोगों को शौचालय नहीं मिले हैं।आज भी महिलाएं व पुरुष खेतों में शौच के लिए जाते हैं।इतना ही नहीं जो शौचालय बने हुए हैं वह भी मानक के अनुरूप नहीं हैं।क्या प्रशासन बंधी गांव में हुए भ्रष्टाचार पर कोई जांच कभी कर भी पाएगा या नहीं?या फिर अनदेखी और उपेक्षा की पट्टी अपनी आंखों पर बांध रखी है!
मुक्तिधाम पहुंच मार्ग की हालत भी कुछ ठीक नहीं है।धूल मिट्टी के गुबार से होते हुए जैसे तैसे मुक्तिधाम पहुंचा जा सकता है।बरसात में तो मुक्तिधाम पहुंचने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
हां लेकिन आंगनबाड़ी भवन का रंगरोगन बाहर से देखने पर आप तंत्र के नकारापन पर हंसी आ जाती है।आंगनबाड़ी कक्ष में विद्युत व्यवस्था नहीं है।आंगनबाड़ी सहयिका के अनुसार केंद्र पर ९० बच्चे दर्ज हैं लेकिन आते सिर्फ बीस पच्चीस बच्चे हैं।
गांव में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था भी अक्सर ठप्प रहती है।पानी नलों में कम और सड़क पर अधिक दिखाई देता है।गांव में कच्चे घरों की लंबी श्रृंखला देखकर आश्चर्य होता है कि क्या यहां प्र मं आ योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है! बंधी के निवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।गांव का कागजी विकास तो हुआ, लेकिन धरातल पर आज भी समस्याओं का अंबार लगा हुआ है।ग्रामीण आरोप लगाते हैं कि लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी विकास कार्य अधूरे पड़े हैं,जबकि कागजात में तो कुछ कार्य पूरे दिखाए गए हैं।अधिकारियों की बैठकें सिर्फ बंद कमरों में ही हो रही हैं।गाँव वालों को तो इसकी भनक भी नहीं लग पाती।अपने चहेतों को योजनाओं का लाभ दिलवाया जा रहा है।अधिकारी और सरपंच,सचिव ने गांव में विकास करवाने के नाम पर जमकर लूट- खसोट की गई।ग्रामीणों ने बताया कि यहां हर जगह फर्जीवाड़ा किया गया है।ग्राम पंचायतों में विकास कार्य के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है।नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया की ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी ने विकास का पैसा हजम कर कागजों में सारा विकास कार्य पूरा दिखा दिया है।
जारी :
जानिए सरपंच राकेश साहू ने क्यों कहा सब मिलकर खायेंगे, ,,
