*रोजगार सहायक ने नियम विरुद्ध तरीके से अपने चहेतों को पहुंचाया लाभ? : ग्राम पंचायत पलेरा: चिचली:नर।*
नरसिंहपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में मनरेगा योजना की जमकर धज्जियां उडाई जा रही है।अधिकारी कर्मचारी व जनप्रतिनिधि के फर्जीवाड़े से यह मनरेगा भुगतान प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है।
हाल ही में ग्राम पंचायत पलेरा से जो हेर फेर का मामला सामने आया है,वह बड़ा ही हैरान करने वाला है। ग्राम रोजगार सहायक ने अपने परिवार के नौ सदस्यों में से छह सदस्यों को नियम विरुद्ध तरीके से मनरेगा मजदूरी का भुगतान किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पंचायत में फर्जी हाजिरी भरकर अपने परिवार को लाभ पहुंचाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि हमारे गांव में विकास कार्य नहीं होने से यहां के लोगों को रोजगार भी नहीं मिलता, जिसके कारण वे इधर उधर मजदूरी करने जाया करते हैं, लेकिन गांव के जनप्रतिनिधि सरकारी पैसों से अपनी जेब गर्म कर रहे हैं।
सरकारी राशि में हेर फेर के मामले को लेकर ग्रामीणों ने अब अपनी कमर कस ली है और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर ग्राम रोजगार सहायक व सचिव पर कार्रवाई की मांग की तैयारी की जा रही है।
सचिव व रोजगार सहायक की मनमानी से ग्रामीण भयंकर त्रस्त हो चुके है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि इनके द्वारा अन्य योजनाओ में भी जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
ग्राम रोजगार सहायक द्वारा मनरेगा में किए गए विभिन्ना कार्यों में अपने पूरे परिवार के नाम मस्टर रोल बनाकर फर्जी हाजरी भरी गई और शासन के महत्वपूर्ण योजना से जरूरतमंद परिवार को मिलने वाले काम को मजदूरो को न देकर परिवार वालों को फायदा पहुंचाकर राशि को गबन कर दूरूपयोग किया गया?
ग्राम रोजगार सहायक ने सचिव और अधिकारियों की मिलीभगत से मजदूर से ज्यादा अपने परिवार को फर्जी काम दे डाला।चुनिंदा लोगों के खातों मे राशि का भुगतान कर के बहुत ही शातिर तरीके से राशियों का हेरफेर करना , ग्राम रोजगार सहायक के बुलंद हौसलों को जाहिर करता है।
आपको जो करना है कर सकते हो, हमे किसी का कोई डर नहीं, आपको जहां जाना है जाओ। इनके व्यवहार एवं रवैया को देखते हुए जाहिर होता है कि कहीं न कहीं प्रशासन का भी इनको सहयोग मिलता है।
ग्रामीणों ने मामले की गंभीरता से जांच कर उक्त राशि को शासन के खाते में डालने व ग्राम रोजगार सहायक और सचिव के खिलाफ कार्रवाई एवम एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है। ग्रामीण कहते हैं कि,शिकायतों की उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर जांच की जाए और यदि रोजगार सहायक दोषी पाया जाता है तो उसे पद से पृथक करने की कार्रवाई तत्काल की जाए।
ग्रामीणों ने कहा कि मनरेगा में लूट की खुली छूट मची हुई है। बिना काम कराये ही पैसे की निकासी कर सरकारी राशि की बंदरबांट कर ली गई है।
हालात इतने गंभीर है कि पंचायत में जनता के भरोसे से बैठे जिम्मेदारों ने इस तरह भ्रष्टाचार किया कि आज न तो कहीं विकास दिख रहा है और न ही कहीं ग्रामीणों का उत्थान हो रहा है।ऐसे अनेक क्रियाकलाप पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा किए गए हैं जो शासन की मंशा के विपरीत है।
यदि हर पंचायत के सरपंच-सचिव और रोजगार सहायक ईमानदारी से करे तो, गांव की तस्वीर और आदिवासी ग्रामीणों की तकदीर बदलने में देर नहीं लगेगी, लेकिन अपनी तिजोरियां भरने से फुर्सत ही इन्हे नही मिलती?
जारी :
ग्राम रोजगार सहायक का अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में कहना है कि,
