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*पैगंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स.अ.व.) की जीवनी पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन*

*रांकई न्यूज@रिपोर्टर शाह फैसल* (दिनांक 30 सितंबर 2023)

रबीउल अव्वल जोकि एक इस्लामी महीना है। इस माह की मुसलमानों के नजदीक इस वजह से अहमियत है क्योंकि इसी माहे मुबारक में इस्लाम के अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) सऊदी अरब के मक्का शहर में पैदा हुए। और यहीं से आपने समाज में फैली हुई कुरीतियों और बुराइयों के खात्मे के लिए अपने व्यवहार से अल्लाह के दीन ए इस्लाम की शिक्षाओं के माध्यम से प्रचार प्रसार कर इस्लाम की बुनियाद पर आधारित एक सभ्य और आदर्श समाज की स्थापना की । आप (स.अ.व.) की शिक्षाएं और आपका अख्लाक उच्च स्तर के मापदंडों को पूरा करने की वजह से आपने पूरी दुनिया में एक आदर्श व्यक्तित्व की छवि स्थापित की। 

यहीं वजह है की आज पूरी दुनिया में आप (स.अ.व.) की अच्छी शिक्षाओं और अखलाकी किरदार की निस्बत दुनिया के लोग आपको दिलो जान से चाहते हैं। और इस माह की आमद पर पूरी दुनिया के मुसलमान खुशी मनाने के लिए जश्न, जुलूस और आपके जीवन के आदर्शवादी मूल्यों और पहलुओं को उजागर करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। 

इसी खुशी के इजहार को कुछ मुसलमान *ईद ए मिलादुन्नबी* का नाम देते हैं। जिसका अर्थ है नबी की पैदाइश की खुशी । इस खुशी को वो जुलूस निकाल कर नारे लगाकर इजहार करते हैं। जिसे वो *जुलूस ए मोहम्मदी* भी कहते हैं। इसके अलावा इस अवसर पर *महफिल ए मीलाद* का आयोजन भी किया जाता है । जिसमें आप (स.अ.व.) की जिंदगी के विभिन्न पहलुओं के आदर्शवान वाकयात बयान किए जाते हैं।

तो वहीं दूसरी ओर कुछ मुसलमानों का मानना है कि आप (स.अ.व.) की पैदाइश पर खुशी का इजहार तो होना ही चाहिए लेकिन ये खुशी अंशकालिक या कभी कभी नहीं होना चाहिए। बल्कि इस खुशी का तकाजा यह है कि आप (स.अ.व.) की पूरी जिंदगी हमारे लिए आदर्श और नमूना हो । जिसे हर वक्त हमें अपनी जिंदगी में व्यवहारिक रूप से अमल करने की जरूरत है। और आप (स.अ.व.) की आदर्शवादी शिक्षाएं न सिर्फ हम तक ही सीमित रहें बल्कि उनकी शिक्षाएं दुनिया के तमाम लोगों के लिए भी हैं। जिसे हम मुसलमानों को एक जिम्मेदारी समझते हुए एक मिशन के रूप के रूप में लगातार आगे बढ़ाने की भी जरूरत है।

इन्हीं तरीकों पर आधारित इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय द्वारा इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) की आदर्शवान जिंदगी पर मुल्क और दुनिया भर में कार्यक्रम होते रहते हैं ।

*ग्राम रांकई में विभिन्न जमाअतों के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित*

*अहले सुन्नत वल जमाअत*

अहले सुन्नत वल जमात की जानिब से *जश्ने ईद मिलादुन्नबी* के नाम पर *जुलूसी मोहम्मदी* का आयोजन कर ग्राम के मुख्य मार्गों पर पैदल और बाइक रैली निकाली गईं। आप (स.अ.व.) की शान में नारे लगाए गए। डीजे साउंड के जरिए नातें पढ़ी गईं। और महफिल ए मीलाद आयोजित की गईं।

*जमाअत ए अहले हदीस*

इस अवसर पर ग्राम की जमाअते अहले हदीस जमात द्वारा कोई अलग से विशेष कार्यक्रम आयोजित नहीं हुए लेकिन मोहम्मदिया मस्जिद के पेश इमाम द्वारा मस्जिद से ही तकरीरी खिताब के माध्यम से आप (स. अ. व.) की सीरत पर बयान दिए गए। 

*जमाते इस्लामी हिंद*

जमाते इस्लामी हिंद की क्षेत्रीय शाखा रांकई करेली के माध्यम से शुक्रवार को खिताब आम के माध्यम से हजरत मोहम्मद (स. अ. व.) की सीरत पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें जमात के जिम्मेदारों द्वारा आप (स. अ. व.) के जीवन के विभिन्न आदर्शवान पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि आपकी शिक्षाएं सिर्फ मुसलमानों के ही लिए नहीं हैं बल्कि उनकी शिक्षाएं तमाम इंसानियत के लिए हैं। आप (स. अ. व.) की यौमे पैदाइश से संबंधित मुस्लिम समुदाय में जो गलत रीति रिवाज बरकरार हैं, उनकी उन्होंने नफी की। उन्होंने बताया कि किसी को मानने का मतलब ये नहीं है कि हम उसके नाम का जाप या विर्द करते रहें बल्कि उनकी शिक्षाओं को भी अपने जीवन के विभिन्न मरहलों में अमली जामा पहनाएं । यही असल मानना है। महज आंशिक और परंपरागत कार्यक्रम आयोजित करने से उनका हक अदा नहीं होगा। बल्कि हमें आप (स. अ. व.) की समस्त शिक्षाओं को मुसलसल कायम रखने के लिए एक मिशन के रूप में काम करने की भी जरूरत है। जमाते इस्लामी के जिम्मेदारों में जनाब गुलाम रसूल साहब, उबैदुल्लाह आमिर साहब और रफीक खान साहब ने अपने अपने विचार प्रकट किए।

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