*सरकारी योजनाओं को कमाऊ योजना बंद करो।*
।। विवेचना ।।
नरसिंहपुर जिले के विकास की तस्वीर देखना हो तो आपको ग्राम पंचायत मोहपानी जाना चाहिए और देखना चाहिए की आज भी आदिवासी परिवार किस स्थिति में जीवन यापन कर रहे हैं।
क्या वाकई उन्हे पानी,सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं?क्या उनका पक्के मकान में रहने का सपना साकार हुआ है?ऐसे और भी तमाम सवाल है जिनके जवाब आपको सिर्फ ग्राम मोहपानी में मिल सकते हैं।
क्यों की आदिवासी बाहुल्य गांव होने के बाद भी मोहपानी विकास को तरस रहा है। कागजी आंकड़ों में भले ही विकास की गाथा गाई जा रही हो लेकिन जमीनी हकीकत विनाश की इस गाथा को बयां कर रही है।
सतपुड़ा की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच कुदरती खुहसूरती और वन संपदा से भरपूर गांव मोहपानी आज के इस कागजी विकास के मुंह पर करारा जवाब है।
हालात कितने बदतर हो सकते हैं , आप इसका अनुमान भी नहीं लगा सकते हैं।पंचायत की बागडोर जितेंद्र कौरव के हाथों में हैं।सरपंच जितेंद्र के इशारे पर चल रही है।सरकारी कागजो पर भी कई बार तो जितेंद्र ही दस्तखत कर देता है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए ये आरोप बेहद ही गंभीर है।यह तो लोकतंत्र का हनन है।
सरपंच की कुर्सी को तमाशा बना दिया गया है,पद की गरिमा जैसी बातें भुला दी गई है,पंचायत को शुद्ध लाभ का व्यापार बनाया जा रहा है?
ग्राम पंचायत भवन में स्वतंत्रता दिवस समारोह ना मनाए जाने जैसी घटनाएं बताती हैं कि, स्थानीय प्रशासन की पूरी तरह से उपेक्षा कर दी गई है।जिसकी लाठी उसकी भैंस की तर्ज पर पंचायत का कामकाज चल रहा है।अधिकारी नीटो की तरह चैन की बंसी बजा रहे हैं?
लगभग पांच सौ की आबादी वाले गांव मोहपानी में मात्र तीन हैंडपंप है।महिलाओं को पानी लेने जाने के लिए भटकना पड़ता है।चौबीस घंटे शुद्ध पेयजल आपूर्ति की कागजी बातें इस गांव के लिए खोखली हैं।महिलाओं का सुबह का आधा समय पानी ढोने में चला जाता है।विकास की ऐसी घिनौनी तस्वीर आपको मोहपानी में ही देखने को मिल सकती है।
जनता ने जिस सरपंच को विकास के लिए चुना वह भी कागजी कठपुतली साबित हुआ। जितेंद्र कौरव का पंचायत में दखल समाज सेवा तो नही कहा जा सकता है।मनचाहे ठेकों में मनचाहा लाभ कमाने की जद्दो जहद में ग्रामीणों का भविष्य दांव पर लगा दिया गया।
जारी :
जिला कलेक्टर सुश्री रिजु बाफना को ग्राम पंचायत मोहपानी के मामले पर संज्ञान लेना चाहिए।आदिवासियों के साथ नाइंसाफी हो रही हो और तब भी यदि जिला कलेक्टर चुप्पी साधे रहें,तब ग्रामीण न्याय की उम्मीद , ,
