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*ना सड़क,ना बिजली ना पानी : ये है मोहपानी।*

।। विवेचना ।।

भ्रष्‍टाचार को लेकर मोहपानी कीयह अकेली कहानी नहीं है। ऐसी कई कहानियां जिले की कई ग्राम पंचायतों से अक्सर सामने आती रहती हैं।जनपद और जिला पंचायत के अधिकारी सरपंच के साथ मिलकर विकास के लिए प्राप्त धन का दुरुपयोग कर रहे हैं।

ऐसे में लोगों को डर सताने लगा है कि, कहीं ऐसा तो नहीं कि धरातल पर कार्य ना होकर कागजों में विकास कार्य हो रहे हो?स्थानीय लोगों ने बताया कि ग्रामसभा की जानकारी भी ग्रामीणों को नहीं दी जाती ,अपनी मनमानी से सरपंच, सचिव बैठक कर खानापूर्ति कर लेते हैं।

भ्रष्टाचार के चलते गांव का विकास नहीं हो पा रहा है। विकास कार्यों में मनमाने तरीके से अनियमितता और अनुपयोगी कार्य कराके जहां सरकारी बजट को चूना लगाया जा रहा है। सरपंच सचिव हर काम में कमाई के चक्कर में कायदे कानून ताक पर रखकर कायदे कानून के पालन से बेपरवाह हैं।

उन्हें न जांच की चिंता है, न अधिकारियों का डर है।सरंपच, सचिव और जितेंद्र कौरव की तिकड़ी का बेलगाम राज चल रहा है।शिकायतों को अनदेखा करके जिम्मेदार मौन धारण किए हुए हैं।

यही वजह है कि अब एक के बाद एक पंचायत के ग्रामीण लंबी शिकायतो के साथ लामबंद हो रहे है। अब सरपंच ,सचिव, जितेंद्र कौरव के साथ साथ प्रशासन का भी विरोध होने लगा हैं।ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव, जितेंद्र कौरव के खिलाफ तमाम तरह के आरोप लगाए है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में शिकायत पर क्या कार्यवाई होती है। क्या सरपंच सचिव पर एफआईआर दर्ज और वसूली की होगी कार्यवाही?

ग्रामीण इतने आक्रोशित हैं कि वे कहते हैं, अपने दायित्व का निर्वहन ना करने वाले सरपंच और पंचायत सचिव को कार्य में अनियमितता एवं फर्जी कार्य के आरोप में जेल भेज दिया जाना चाहिए।

पंचायतों में बिना विकास कार्य के ही धन राशि निकाली जा रही है, लेकिन खुलेआम हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने को लेकर कार्रवाई नहीं की जा रही।मनरेगा से हो रहे निर्माण कार्यो का जमकर दुरूपयोग किया गया है।

ग्रामीणों ने मोहपानी से सचिव और सरपंच को पद से हटाने की मांग की है।ग्रामीणों ने महिला सरपंच पर भ्रष्टाचार करने का, पद का दुरुपयोग करने और दायित्वों का निर्वहन ना करने का आरोप लगाया है।

आज भी ग्राम पंचायतों के विकास का पैसा पंचों-सरपंचों, ग्राम सचिवों, ग्राम रोजगार सहायकों ,पंचायत अधिकारियों, ठेकेदारों व स्थानिय नेताओं द्वारा मिल-जुलकर डकारे जाने के सैकड़ों मामले लंबित पड़े हुए हैं ऐसे में यह उम्मीद की मोहपानी के ग्रामीणों को न्याय मिलेगा धुंधली दिखाई देती है।

सच तो यह है कि,पूरा गाँव जान रहा होता है कि सरपंच सचिव और जीआरएस द्वारा घोटाला किया गया है और यदि कभी कोई एक आध ग्रामीण हिम्मत करके सरपंच सचिव और जीआरएस द्वारा किए गड़बड़झाले की शिकायत कर भी देता है तो ये भ्रष्टाचारी पंच-सरपंच, यहां वहां भागकर अपनी-अपनी जान-पहचान के राजनेताओं की शरण में पहुंच जाते हैं।नेताओं का यही आशीर्वाद इनके लिए ब्रह्मास्त्र का काम करता है।ग्रामीण जानते हैं कि इनकी शिकायत करने का कोई फायदा नहीं होता है, क्योंकि सफेदपोश इन्हें बचाने वाले हैं। यहां सवाल यह उठता है कि,आखिर कब खत्म होगा ग्राम पंचायतों में राजनीतिक हस्तक्षेप?कब तक भ्रष्ट पंचायतियों को शह देते रहेंगे सफेदपोश?











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