सांकेतिक चित्र ।
ग्राम पंचायत रांकई।
हाल ही में ग्राम पंचायत रांकई में उपजे विवाद में जो बात निकलकर सामने आई वह बड़ी चौकाने वाली है।दरअसल जब भी सरपंच सुनीता ठाकुर से जुड़ी कोई चर्चा बाजार की सुर्खियां बनती हैं तब अक्सर एक बयान सामने आता है की,ये महिला इस गांव की नही थी।यह तो बाजू वाले गांव में निवास करती थीं।चुनाव के समय इन्हे यहां लाया गया और निर्विरोध सपंच बनाया गया।
अब यहां यह सवाल उठता है कि चुनाव के समय सुनीता ठाकुर को लेने कौन गया था? किन आश्वासनों और दावों के बूते पर सुनीता ठाकुर को सरपंच बनने के लिए सहमत किया गया?किसके कहने पर एक दूसरे गांव की महिला को निर्विरोध चुना गया?कहीं यह लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया के साथ कोई भद्दा मजाक तो नही है? कहीं ऐसा तो नहीं की कुर्सी की ख्वाहिश में नियम कायदे से खिलवाड़ किया गया?
आखिर इस बीच ऐसा क्या हुआ की सरपंच सुनीता ठाकुर जनवरी माह से आंखों में खटकने लगी और नित नए विवाद सामने आने लगे?
जारी :
जल्द ही हम आपको बताएंगे की, ऑन कॉल साक्षात्कार के दौरान किसके द्वारा क्या बयान दिया गया।
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