ग्राम पंचायत खुरपा।
गांव में प्रवेश करते ही मुख्य मार्ग पर शोभा बढ़ा रहे शासकीय भवनों को देखकर ऐसा प्रतीत हो सकता है कि विकास धरातल पर उतर आया है।
लेकिन गांव की अंदुरूनी तस्वीर से रूबरू होते है तो विकास का यह भ्रम टूटता हुआ लगता है।
गांव की स्थिति का जायजा लेने के लिए जब हम ग्रामीणों के समूह के बीच पहुंचते है ,तब ग्रामीणों को वर्तमान स्थितियों के बीच असंतुष्ट पाते हैं।जब इसकी वजह जानने की कोशिश करते हैं, तब सच की परत दर परत खुलती जाती है।
वार्ता के दौरान बातों बातों में ग्रामीण संशय प्रकट करते हुए कहते हैं कि, जितनी राशि मिली उतना विकास अब भी हुआ है या नहीं यह कभी जानने की कोशिश क्यों नही की जाती है?
ग्रामीण दबी जुबान में जाहिर करते हैं कि, गांव में अव्यवस्था और आपसी खींचतान से ग्रामीणों को जो तकलीफें झेलनी पड़ रही है, वह बेहद परेशान करने वाली और अस्वीकार्य है।
ग्रामीण पूछते हैं कि ग्रामीणों के उत्तम स्वास्थ्य ,शिक्षा और आजीविका के लिए जिम्मेदार कौन है?क्या प्रशासन शासकीय योजनाओं के शत प्रतिशत क्रियान्वयन के झूठे दावे कर रहा है?क्या बुनियादी सुविधाओं के लिए अब भी भटकना होगा?
अव्यवस्था,अराजकता और आपसी खींचतान को लेकर जब इस बात की पुष्टि के लिए ग्राम के लोगों से बात की तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि -
आगले अंक में जारी ----
विशेष रिपोर्ट - 7-3-2022@4:00pm
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