नरसिंहपुर।
मार्च के महीने में ही ऐसा प्रतीत हो रहा है ,जैसे सूरज की किरणें मानो आग बरसा रही हैं।तेज धूप में पसीना बहाकर मजदूर अपना काम करते हैं। हाड़ तोड़ मेहनत के बाद भी इस मंहगाई के दौर में परिवार का गुजारा नहीं हो पाता है।
राह में कभी कभी कुछ दृश्य मन को झकझोर कर रख देते हैं। झुलसा देने वाली धूप में चिलचिलाती गर्मी के बीच दुधमुंहे बच्चे के साथ महिला मजदूर का दो निवालों के लिए संघर्ष मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण किसी भी ह्रदय को विचलित कर सकता है।
उस पर भी बदनसीबी देखिए ना जाने कितने ही मजदूर बिना जूते चप्पल के नंगे पांव काम करने के लिए मजबूर हैं।
इत्तफाक से यह दृश्य देखने के लिए आपको किसी इमोशनल बॉलीवुड मूवी का सहारा लेने की जरूरत नहीं है,यदि आप गौर करेंगे तो अपने ही आस पास ऐसे मजबूर मजदूर आपको आसानी से दिख जायेंगे।
मजदूर गीता बाई कहती हैं कि जब घर में खाने के लिये भी पैसे न हों, तो फिर चप्पल कहां से खरीदें।
कई बार मजदूरों के कार्य स्थल पर पेयजल भी उपलब्ध नहीं होता है।
आंकड़े अपनी तमाम गाथा गाते हैं,चार दान चालीस का बखान की तर्ज पर पब्लिसिटी के खेल भी चलते रहेंगे।
किंतु क्या इन सबके बीच मजदूरों की सुध ली जाएगी?गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन मजदूरों के लिए क्या व्यवस्था करेगा?
आगामी विशेष रिपोर्ट - - - -
STRINGER24NEWS पर।