ग्राम पंचायत नादिया।
मनरेगा,खेल मैदान और मुक्तिधाम के मामलों पर जानकारियां उपलब्ध न कराए जाने को क्या समझा जाना चाहिए।क्या इसे यह माने की अपने ही पैदा किए हुए भ्रष्टाचार के भस्मासुर से सरपंच, सचिव घबरा रहे हैं?
आरटीआई में उक्त विषयों से संबंधित जानकारी मांगने पर आरटीआई को लौटा देना सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत अपराध है।बावजूद इसके ग्राम पंचायत सच को छिपाने के लिए जवाब देने से बचने की कोशिश कर रही है।
जबकि ग्रामीणों की माने तो खेल मैदान,मुक्तिधाम और मनरेगा कार्यों को लेकर अनियमितताओं का संदेह है।
क्या ग्राम पंचायत की मनमानी का खामियाजा भोले भाले ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा?
जिले में कई ऐसी ग्राम पंचायत हैं, जहां पहले भी व्यापक स्तर पर गड़बड़ी हो चुकी हैं, जहां जीआरएस और सचिवों पर कार्यवाही भी हुई लेकिन अक्सर ग्राम प्रधान जांच और कानून से बचते हुए नजर आए हैं!
जानकारियों को क्यों छिपाया जा रहा है इसका जवाब गांव के सरपंच ,सचिव, रोजगार सहायक ही दे सकते हैं, और जब हमारे द्वारा सच जानने को कोशिश की गई तब स्पष्ट रूप से जो जानकारियां मांगी गई उनका जवाब देने से मना कर दिया गया व उल्टा कुछ ग्रामीणों पर आरोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की गई।
दबी जुबान में ग्रामीण सरपंच और सचिव पर झोलझाल का आरोप लगा रहे हैं।
नाम ना छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति हेतु मजदूरों की हाजिरी फर्जी रूप से डाली गई है,एवम चहेतों को लाभ दिया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों के हालात पर नजर डालें तो, हम पाते हैं कि, अनेक ग्राम पंचायतों में सरपंच सचिव की लापरवाही एवं उदासीनता के चलते योजनाये धरातल पर दम तोडती नजर आती है!
चांदी के सिक्कों की खनक के सामने भ्रष्टाचारियों को ना नियमों की परवाह है न किसी का डर?क्या चांदी के सिक्कों के भूखे भेड़ियों को संरक्षण प्राप्त है।
भ्रष्टाचार के जरिए ग्रामीणों का हक डकारने वाले हैवानो ने अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए ना सिर्फ शासन को चुना लगाया बल्कि मानवीयता को भी कलंकित किया है!
आगामी विशेष रिपोर्ट - 7-3-2022@5:00pm
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