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*मध्याह्न भोजन (एमडीएम) चूल्हे पर बनाया जा रहा: प्रा. शा. . ग्राम बरहेटा: गोटेगांव: नरसिंहपुर।*

लकड़ी के चूल्हे से उठने वाले धुएं से बच्चों की सेहत पर असर पड़ रहा है।सरकार की योजनाओं को ताख पर रखते हुए बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसमें विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है।

खाना बनाने वाली महिलाओं ने बताया कि गैस चूल्हे पर भोजन तैयार करने में समय अधिक लगता है। इससे मध्यान्ह भोजन लकड़ी के चूल्हे पर तैयार कराया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों ने समय पर मध्यान्ह भोजन मिल सके।
 
सूत्र बताते हैं कि रसोई महिलाएं रसोई घर में ही गैंस से खाना बनाना चाहती हैं, लेकिन प्रधानाध्यापक अपनी तानाशाही के चलते कड़ी धूप में मध्याह्न भोजन बनाने के लिए विवश करते हैं। विद्यालय पर लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने से उठने वाले धुएं से बच्चों के सेहत व रसोईयों पर बुरा असर पड़ रहा है, फिर भी प्रधानाध्यापक का दिल नहीं पसीज रहा है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से विधिवत निरीक्षण किया जाए तो उक्त विकास खंड के कई विद्यालयों में यह खामियाजा देखने को मिल सकता है।

शाला परिसर में संचालित किचन में पाया कि स्व सहायता समूह द्वारा विद्यालय का मध्याह्न भोजन एलपीजी गैस के स्थान पर मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी एवं उपले का प्रयोग कर बनाया जा रहा था। यह तो बानगी मात्र है।लकड़ी के चूल्हे पर मध्यान्ह भोजन बनाने से स्कूल की किचन में धुंआ होने से किचन की दीवारें काली हो गई हैं। जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्कूल के विद्यार्थियों को धुएं भरी रोटियां खाना पड़ रही है। इससे उन्हें बीमारी की आशंका बनी रहती है। वहीं समूह की महिलाओं को भी धुएं की वजह से खासी व दमा की बीमारी होने का भय बना रहता है।

















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